Press Note – Dehradun 1 September 2016


September 2, 2016 Facebook Twitter LinkedIn Google+ News - Information Department, Uttarakhand


मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा सरंक्षण मंत्री उमा भारती से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरूवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा सरंक्षण मंत्री उमा भारती से मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री को बताया कि एनजीटी द्वारा राज्य में एसटीपी निर्माण कार्य को छः महीने के अन्दर पूरा करने के निर्देश दिये गये थे। WAPCOS को आकलन, फिजीबिलीटी स्टडीज तथा आरम्भिक गतिविधियों के लिए बिना राज्य सरकार की सहमति के कार्यदायी संस्था तथा PMC नियुक्त किया गया है। WAPCOS को PMC एवं क्रियान्वयन संस्था नियुक्त करना हितो में टकराव के कारण बन गया है। राज्य कार्यदायी एंजेसी द्वारा जमा कि गयी डीपीआर का कोई संज्ञान नही लिया गया है जबकि WAPCOS द्वारा जमा किये गये प्रोजेक्टों को छडब्ळ द्वारा बहुत छोटे समय में ही अनुमोदित कर दिया गया। WAPCOS द्वारा 13 शहरों की आकलन रिर्पोट उत्तराखण्ड जल संस्थान द्वारा बनायी गयी डीपीआर के आकंड़ों के आघार पर तैयार की गई है जबकि इसे अपनी रिर्पोट व्यापक सर्वेक्षण तथा आकलन के आधार पर तैयार करनी थी। WAPCOS को नमामि गंगा कार्यक्रम के अन्र्तगत गंगा बेसिन में आरम्भिक स्तर की गतिविधियों का उत्तरदायित्व दिया गया है। यह उचित होगा कि 132 ग्राम पंचायतों में आरम्भिक स्तर की गतिविधियों को पूरा किया जाय तथा बायो इायजेस्टर लगाने के लिए डीपीआर शीघ््रा जमा की जाय। नदी संरक्षण राज्य का विषय है। अतः केन्द्र तथा राज्य द्वारा यह उत्तरदायित्व उचित रूप से उठाया जाना चाहिये बिना स्थानीय लोगों, संस्थाओं के यह प्रोजेक्टस सफल नही हो सकते। पंचायती राज संस्थाओं को इस समझौते में शामिल करने की जरूरत है। राज्य के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्टस के ओ एंड एम राज्य द्वारा निर्धारित एंजेसी जैसे जल संस्थान द्वारा किया जाना चाहिये। स्वच्छ भारत मिशन के अन्र्तगत गंगा बेसिन में 132 ग्राम पंचायतों में ख्.ाुले में शौच से मुक्ति के लिए कार्य प्रगति पर है तथा 40 ग्राम पंचायतों में यह कार्य हो पूरा हो चुका है। हमें धार्मिक कार्यक्रमों, चार धाम तथा अन्य उत्सवों के सम्य गहन जन जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। रामनगर, सितारगंज तथा काशीपुर में औद्योगिक व सीवेज प्रदूषण से सम्बन्धित कार्यो को नमामि गंगा के अन्र्तगत वितीय सहायता दिये जाने की आवश्यकता है। राज्य द्वारा रूपये 951.98 करोड़ की 25 डीपीआर जमा कर चुका है परन्तु उन्हें अनुमोदन प्राप्त नही हुआ है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री को पूर्व प्रेषित विभिन्न मांगों से सम्बन्धित पत्र का भी संदर्भ दिया। पत्र में मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्द्रीय मंत्री से उत्तराखण्ड राज्य में निर्माणधीन केन्द्रपोषित योजनाओं हेतु अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान करते हुये अवशेष कुल केन्द्रांश की धनराशि रू0 732.23 करोड़ अवमुक्त करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्द्रीय मंत्री से भेंट के दौरान कहा कि पूर्व में योजना आयोग भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड के पुनर्निर्माण हेतु केन्द्रपोषित योजनाओं के अन्तर्गत विशेष पैकेज के माध्यम से ए0आई0बी0पी0 एवं बाढ़ नियंत्रण हेतु रू0 879.50 करोड़ स्वीकृत किये गये थे। उक्त विशेष पैकेज के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा 54 बाढ़ सुरक्षा योजना लागत रूपये 657.79 करोड़ पर कार्य सम्पादित कराये जा रहे है। जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उक्त योजनाओं पर केन्द्रांश की धनराशि रूपये 460.45 करोड़ के सापेक्ष सिर्फ वित्तीय वर्ष 201415 में मात्र रू0 43.81 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने बताया कि सीएसएस आर, सीएसएस एफएमपी एवं एआईबीपी के अन्तर्गत संचालित योजनाओं पर जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कुल 732.23 करोड़ केन्द्रांश की धनराशि अवमुक्त की जानी अवशेष है। निमार्णधीन कार्यो की धनराशि अवमुक्त न होने के कारण न केवल कार्य अधूरे पडे़ है तथा व्यय की गई धनराशि से कोई लाभ भी प्राप्त नहीं हो पाता है तब तक कि पूरी परियोजना पूर्ण न हो जाये। मुख्यमंत्री ने उक्त धनराशि शीघ्र अवमुक्त करवाने का अनुरोध किया।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर अभियान की 6 टीमों को सचिवालय परिसर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।

राज्य सरकार द्वारा दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिये गुरूवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हंस फाउण्डेशन एवं आकाश अस्पताल के सहयोग से प्रदेश के सभी विकासखण्डों में विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर अभियान की 6 टीमों को सचिवालय परिसर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में चिकित्सा सेवा के स्तर को सुधारने के लिये प्रतिबद्ध है, इसके तहत, विशेषज्ञों चिकित्सकों की टीमों द्वारा राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में कैम्प लगाकर 25 प्रकार की निशुल्क स्वास्थ्य जांच सहित ईलाज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत 33 टीमें गढ़वाल एवं कुमांऊ मण्डल के लिये रवाना की गयी हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सभी का स्वास्थ्य परीक्षण, जिसमें 25 प्रकार की स्वास्थ्य जांचे शामिल हैं, मुफ्त किया जाएगा एवं बी.पी.एल. परिवारों का रू0 1.75 लाख तक का ईलाज मुफ्त किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर मरीज को मेडिकल काॅलेज में रेफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं को पहुँचाने के प्रयास कर रही है। उन्होंने इस योजना में सहयोग के लिये हंस फाउण्डेशन व आकाश अस्पताल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में सुधार हेतु अन्य सामाजिक संस्थाओं को भी इसके लिये आगे आना होगा। उन्होंने निजी क्षेत्र से भी इसमें सहयोग की उम्मीद की है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी सहित स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी, आदि उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की राजकीय प्रधानाचार्य एशोशियेशन उत्तराखण्ड की समस्याओं के संबंध में बैठक।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ करने को कहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा का बेहतर वातावरण बनाने के लिये विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति में शीघ्रता आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान में प्रभारी प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत अध्यापकों को तदर्थ रूप से नियुक्त करने के साथ ही इन्हें प्रधानाचार्य के वेतन सहित सभी प्रशासनिक अधिकार प्रदान करने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने निर्देश दिये कि इस संबंध में नियमावली के तहत अन्य जो भी रियायत प्रधानाचार्यों की नियुक्ति आदि के लिये दी जा सकती हो वह दी जाए। इसके लिये उन्होंने मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव को कार्यवाही हेतु निर्देश दिए हैं। गुरूवार को सचिवालय में राजकीय प्रधानाचार्य एशोशियेशन उत्तराखण्ड की समस्याओं के संबंध में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री श्री रावत ने निर्देश दिये कि प्रधानाचार्यों के बिना विद्यालयों में शिक्षा का वातावरण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इसके लिये प्रभारी के रूप से नियुक्त प्रधानाचार्यों को तदर्थ रूप से नियुक्त करने तथा उन्हें प्रधानाचार्यों का वेतन सहित अन्य सभी अधिकार प्रदान करने के संबंध में शीघ्र कार्यवाही करने को कहा है। उन्होंने विद्यालयों में सफाई सहायक की नियुक्ति तथा प्रधानाचार्यों को कार्यालय व्यय आदि के लिये धनराशि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई का वातावरण बनाने में प्रधानाचार्यों सहित सभी अध्यापकगण सहयोग करें। उनकी समस्याओं के समाधान के लिये हर संभव प्रयास किये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत से वार्ता के बाद राजकीय प्रधानाचार्य एशोशियेशन के प्रतिनिधि अपनी समस्याओं के समाधान से संतुष्ट नजर आये तथा इसके लिये उन्होंने मुख्यमंत्री श्री रावत का आभार जताया है। बैठक मंे कैबिनेट मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी, हरीश चन्द्र दुर्गापाल, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव डाॅ.रणवीर सिंह, सचिव डी.एस.गब्र्याल, विनोद शर्मा, प्रधानाचार्य एशोशियेशन के प्रान्तीय अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह बिष्ट, महामंत्री रविन्द्र प्रसाद द्विवेदी, उपाध्यक्ष श्रीमती हेमवन्ती नौटियाल, सोबत सिंह नेगी सहित शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की दून मेडिकल कालेज की व्यवस्थाओं के सम्बंध में बैठक।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दून मेडिकल कालेज के साथ ही दून चिकित्सालय की व्यवस्थाओं मे सुधार लाने के निर्देश दिये है। उन्होने निर्देश दिये कि दून चिकित्सालय में इलाज के लिये आने वाले लोगो को सभी आवश्यक सुविधाये उपलब्ध हो इसकी जिम्मेदारी सीएमएस की सौंपी जाय इसके लिये सीएमएस को 3 लाख रू0 तक की वित्तीय स्वीकृति तथा मेडिकल कालेज की प्रशासनिक व्यवस्थाओ के लिये प्रधानाचार्य को 7 लाख के वित्तीय अधिकार प्रदान किये जाए। दून मेडिकल कालेज व दून चिकित्सालय की आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिये उन्होंने 5 करोड़ की धनराशि की स्वीकृति भी प्रदान की। गुरूवार को सचिवालय में दून मेडिकल कालेज की व्यवस्थाआंे के सम्बंध में आयोजित बैठक मे मुख्यमंत्री श्री रावत ने निर्देश दिये कि दून चिकित्सालय की व्यवस्थाये सुधारी जाय। सीएमएस व प्रधानाचार्य यह सुनिश्चित करे कि यहां आने वाले बीमार व्यक्तियों को कोई परेशानी न हो, दून चिकित्सालय का अपना नाम है लोग यहा पर इलाज के लिये आते है अतः यहा व्यवस्थाये सही होनी चाहिए। उन्होने कहा कि दून चिकित्सालय को व्यवस्थाओं मे सुधार हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होने दून मेडिकल कालेज को 5 करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के साथ ही प्रधानाचार्य को 7 लाख तथा सीएमएस को 3 लाख तक वित्तीय अधिकार प्रदान करने को कहा ताकि व्यवस्थाओं की सुधार हो। उन्होने कहा कि दून चिकित्सा को प्राप्त होने वाली यूजर चार्जेज की पचास प्रतिशत धनराशि भी प्रधानाचार्य के निवर्तन पर रखी जायेगी, ताकि अस्पताल की आवश्यक व्यवस्थाओं के लिये धनराशि की कमी न हो। उन्होने अस्पताल में पैथालाजी के काउण्टर बढ़ाने कोरेनेशन अस्पताल मे महिला चिकित्सा वार्ड स्थापित करने के साथ ही दून अस्पताल मे डेंगू के लिये 30 बेड की व्यव्स्था व आई.सी.यू. में भी अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने को कहा। मेडिकल कालेज की व्यव्स्थाओं के लिये उन्होने प्रधानाचार्य की अध्यक्षता मे तीन सदस्यीय समिति गठन के भी निर्देश दिये। सीएमएस व वित्त नियंत्रक इसमे सदस्य रखे जायेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव शत्रुघ्न सिंह, सचिव डा0 भूपेन्द्र कौर ओलख, डी0सैंथिल पांडियन, अपर सचिव पंकज पाण्डेय, प्रधानाचार्य डा0 प्रदीप भारती गुप्ता, निदेशक डा0 आशुतोष सदाना, सीएमएस डा0के0के0टम्टा आदि उपस्थित थे।

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