Press Note – Dehradun 24 September 2016


September 25, 2016 Facebook Twitter LinkedIn Google+ News - Information Department, Uttarakhand


मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में आयोजित ईजीएम की बैठक में पर्यटन विभाग की पीपीपी मोड में 25 करोड़ रूपये से अधिक लागत की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

शनिवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में आयोजित ईजीएम(इम्पावर्ड ग्रुप आॅफ मिनिस्टर) की बैठक में पर्यटन विभाग की पीपीपी मोड में 25 करोड़ रूपये से अधिक लागत की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। ईजीएम बैठक में जिन परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई उनमें टिहरी झील के सन्निकट पर्यटन योजनाओं के अन्तर्गत हिल रिजार्ट गंजना लागत 38.1 करोड़, बेलनेस रिट्रीट गौरान 37.4 करोड़, तीन सितारा होटल कोटी 38.7 करोड़ रूपये, कोटी कालोनी में 7 इको लाग हट, फ्लोटिंग रेस्टोरंेट बहुउद्देशीय हाल, सिराइन में 20 फ्लोटिंग हट, फ्लोटिंग केफेटेरिया तथा लाउज लागत 37 करोड़ रूपये के साथ ही झड़ी पानी मसूरी इको टूरिज्म परियोजना में 33.44 करोड़ रूपये, खनिज नगर मसूरी 58.49 करोड़ व जार्ज एवरेस्ट मसूरी 136 करोड़ की योजनाएं शामिल है। इन परियोजना से राजस्व प्राप्ति आदि के अनुश्रवण हेतु पर्यटन विभाग में प्रोजेक्ट माॅनिटरिंग कमेटी का सृजन किया जायेगा। परियोजनाओं की सफलता के लिये सड़कों, विद्युत आपूर्ति व पेयजल आदि की आपूर्ति संबंधित विभागों द्वारा की जायेगी। नियोजन विभाग के स्तर पर भी इन योजनाओं का परीक्षण किया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री श्री रावत ने निर्देश दिये कि परियोजनाओं पर शीघ्र कार्य आरम्भ हो यह सुनिश्चित किये जाय। उन्होंने परियोजनाओं की सफलता के लिये ईजीएम की ओर से सचिव पर्यटन को यह अधिकार भी दिये कि यदि परियोजनाओं के संचालन में कोई समस्या आये तो उसका वे अपने स्तर से समाधान कर सकते है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन योजनाएं धरातल पर दिखाई दे, इसके लिये यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाय कि एक माह के अंदर उद्यमी को सभी स्वीकृतियां उपलब्ध हो जाय। इसके लिये यदि नियमों में संशोधन भी करने पडे तो वह अविलम्ब किया जाय। योजनाओं के लिये भूमि उलब्धतता की स्वीकृति में भी विलम्ब न हो, इसके लिये उन्होंने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति को इसका अधिकार दिया है। टिहरी जैसे अन्य नगरों में जितना इन्वेस्ट किया गया है। उसका फायदा राज्य को मिलना चाहिए। हमारा रवैया योजनाओं को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि वीएचईएल, आईडीपीएल टिहरी, एचएमटी जैसे संस्थानों के परिसरों में जो जमीन उपयोग में नहीं आ रही हो। उसका विवरण तैयार किया जाय। उन्होंने आदर्श गांवों की माॅनिटरिंग के साथ ही राज्य की 2025 तक के विकास की कार्ययोजना तैयार करने तथा राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के संबंध में जो इनीसियेटिव लिये है उनकी मेपिंग करने को कहा। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी बल दिया। बैठक मंे कैबिनेट मंत्री डाॅ.(श्रीमती) इंदिरा हृदयेश, दिनेश अग्रवाल, मंत्री प्रसाद नैथानी, दिनेश धनै, विधायक राजकुमार, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, सचिव डाॅ.भूपिन्दर कौर ओलख, अमित नेगी, शैलेश बगोली आदि उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत से सचिवालय में उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट की।

मुख्यमंत्री हरीश रावत से सचिवालय में उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट की। उन्होंने उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत महिला कार्मिकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा प्रदान के लिये मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने महिला कार्मिकों का आह्वान किया कि वे महिलाओं में एनीमिया व ल्यूकारिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी सहायोगी बने। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार के साथ ही सामाजिक सहयोग मिले तो इसमें सफलता पायी जा सकती है। उन्होंने उपनल कर्मियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान का भी आश्वासन दिया। इस अवसर पर रवि पंचैरी सहित बड़ी संख्या में उपनल कर्मी मौजूद थे।

 

चिव गृह विभाग विनोद शर्मा ने बताया कि ज्वालापुर हरिद्वार निवासी शहनबाज मंसूरी को जिला कारागार, हरिद्वार मेें अशासकीय पर्यवेक्षक(जेल विजिटर) नियुक्त किया गया है।

सचिव गृह विभाग विनोद शर्मा ने बताया कि ज्वालापुर हरिद्वार निवासी शहनबाज मंसूरी को जिला कारागार, हरिद्वार मेें अशासकीय पर्यवेक्षक(जेल विजिटर) नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 01 वर्ष के लिये होगी तथा उन्हें अशासकीय पर्यवेक्षक के रूप में कोई पारिश्रमिक/मानदेय देय नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जेल मैनुअल के प्राविधानों के अन्तर्गत अशासकीय पर्यवेक्षक द्वारा कारागार का पर्यवेक्षण 02 बजे अपराह्न के पश्चात और सूर्याेदय के पूर्व किसी भी समय नही किया जायेगा। किसी एक अवसर पर ऐसे पर्यवेक्षण की अवधि जिला कारागार में दो घण्टे से अधिक की नहीं होगी। सचिव श्री शर्मा ने बताया कि कारागार में अशासकीय पर्यवेक्षक की संख्या बहुत अधिक होने के दृष्टिगत जिला मजिस्ट्रेट ऐसे अशासकीय पर्यवेक्षको ंकी एक सूची बारीबारी से पर्यवेक्षण करने के लिये बनायेंगे। अधीक्षक कारागार, कारागार में आये पर्यवेक्षक के साथ एक उत्तरदायी कारागार अधिकारी और मार्गदर्शक दल की व्यवस्था करेंगे।

 

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