Press Note – Dehradun 25 October 2016


October 26, 2016 Facebook Twitter LinkedIn Google+ News - Information Department, Uttarakhand


गंगा स्वच्छता बनाये रखने के लिए हरिद्वार के सराय में 18 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी), अहबाब नगर में सीवरेज स्कीम, त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में सीवरेज स्कीम, तपोवन में सीवरेज स्कीम और एसटीपी, देव प्रयाग में 1.4 एमएलडी की एसटीपी का निर्माण 84.76 करोड़ रूपये की लागत से कर दिया गया है।

 

गंगा स्वच्छता बनाये रखने के लिए हरिद्वार के सराय में 18 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी), अहबाब नगर में सीवरेज स्कीम, त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में सीवरेज स्कीम, तपोवन में सीवरेज स्कीम और एसटीपी, देव प्रयाग में 1.4 एमएलडी की एसटीपी का निर्माण 84.76 करोड़ रूपये की लागत से कर दिया गया है। इसके अलावा 44.80 करोड़ रूपये की लागत से गंगोत्री में सीवरेज स्कीम और एक एमएलडी की एसटीपी, बद्रीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर और देवप्रयाग में डायवर्जन का कार्य चल रहा है। यह जानकारी मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को नमामि गंगे के स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक मेें दिये। बैठक में बताया गया कि गंगा के किनारे जनपद चमोली में बद्रीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गोचर और कीर्तिनगर, जनपद रूद्रप्रयाग में रूद्रप्रयाग, जनपद उत्तरकाशी में उत्तरकाशी, जनपद पौड़ी में श्रीनगर, जनपद टिहरी में टिहरी, मुनि की रेती, देवप्रयाग, जनपद देहरादून में ऋषिकेश और जनपद हरिद्वार में हरिद्वार शहरों का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया गया है। म्यूनिसिपल वेस्ट वाटर के शोधन के लिए 05 प्रोजेक्ट पूरे हो गये है। और 05 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। वाह्य सहायतित परियोजना के तहत् मुनि की रेती, ढ़ालवाला और हरिद्वार में कार्य किया जा रहा है। देवप्रयाग, गंगोत्री और उत्तरकाशी में मरम्मत व पुनर्निर्माण का कार्य किया जा रहा है। बताया गया कि 762 करोड़ रूपये की परियोजनाएं नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा को दिये गये हैं। इसके अलावा साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिये 230 करोड़ रूपये की पीडीआर भी एनएमसीजी को प्रस्तुत की गयी है। रीवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य वेपकाॅस द्वारा किया जायेगा। गंगा किनारे के सभी 132 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ कर दिया गया है। बैठक में भारत सरकार के नमामि गंगे प्रोजेक्ट डायरेक्टर यूपी सिंह और राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने परेड़ ग्राउन्ड में आयोजित हिमान्या सरस मेला में ‘‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को सीड केपिटल व सामुदायिक निवेश निधि के तहत सहायता राशि के चैक वितरित किए।

सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने परेड़ ग्राउन्ड में आयोजित हिमान्या सरस मेला में ‘‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को सीड केपिटल व सामुदायिक निवेश निधि के तहत सहायता राशि के चैक वितरित किए। विभिन्न जिलों के महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 हजार रूपए की सीड केपिटल व 20 हजार रूपए की सामुदायिक निवेश निधि के चैक प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों की बढ़ती भागीदारी से राज्य सरकार बहुत उत्साहित है। चमोली व देहरादून में महिला हाट स्थापित करने के लिए बजट जारी किया जा चुका है। ऐसे हाट प्रत्येक जिले में स्थापित किए जाने हैं। इंदिरा अम्मा कैंटीन फूड सेक्टर में महिलाओं को प्रोत्साहित करने का एक कन्सेप्ट है। प्रदेश में 100 इंदिरा अम्मा कैंटीन स्थापित की जाएंगी। अभी तक 20 से अधिक कैंटीन स्थापित की जा चुकी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई पहलों से धीरेधीरे हमारी बहनें सभी जगह काम करती हुई दिखाई देंगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड के आर्थिक विकास का नया सोपान महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला मंगल दलों, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकत्रियों व भोजनमाताओं की सहभागिता से तय किया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनके लिए वेकअप मनी के तौर पर 5 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। काम प्रारम्भ करने पर 20 हजार रूपए की सामुदायिक निवेश निधि भी दी जा रही है। जो महिला स्वयं सहायता समूह क्लस्टर आधार पर सामूहिक रूप से खेती, बागवानी, दुग्ध उत्पादन या हस्तकला का काम करते हैं उन्हें 1 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि इस तरह की योजना बनाई जा रही है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को पुराने ऋण से मुक्ति मिल सके। राज्य ब्याज उपादान योजना के तहत जिन महिला स्वयं सहायता समूहों के बैंक ऋण 31 दिसम्बर 2013 तक एनपीए हो गए थे, यदि ऐसे समूह काम करना चाहते हैं और मूलधन की राशि देते हैं तो एनपीए होने के दिनंाक से वर्तमान समय तक का ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी। अच्छा काम करने वाले व समय पर ऋण की वापसी करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को 3 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी राज्य सरकार देगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को उनके वार्षिक टर्नओवर पर 5 प्रतिशत बोनस जबकि आपदाग्रस्त जिलों में 10 प्रतिशत बोनस दिया जाएगा। अपने खेतों में काम करने वाली महिलाएं मनरेगा श्रमिक के रूप में पंजीकरण करवा सकती है। महिलाओं में एनिमिया व ल्यूकेरिया की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर अभियान प्रारम्भ किया गया है। महिला उद्यमिता पार्क के लिए सिडकुल में 200 एकड़ भूमि की व्यवस्था की गई है। सरकार द्वारा की गई छोटीछोटी पहलों से आने वाले समय में उŸाराखण्ड में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। इस अवसर पर विधायक गणेश गोदियाल, राजकुमार, ममता राकेश, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, अपर सचिव युगल किशोर पंत सहित विभिन्न जिलों से आए महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित थे।

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