Press Note – Dehradun 7 October 2016


October 8, 2016 Facebook Twitter LinkedIn Google+ News - Information Department, Uttarakhand


शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निजी एवं सामूहिक खेती की वन्यजीवों से सुरक्षा हेतु वन विभाग, कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निजी एवं सामूहिक खेती की वन्यजीवों से सुरक्षा हेतु वन विभाग, कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री श्री रावत ने आदेश दिये कि कैम्पा, आर.के.वी.वाय., मनरेगा, काॅपरेटिव को मिलाकर 2 साल के लिये 100 करोड़ का एक फ्लैक्सिव प्रोजेक्ट तैयार किया जाए। इसके अन्तर्गत ग्रामीण खेती को वन्यजीवों से सुरक्षित रखने हेतु वन्यजीव रोधी दीवारों का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इस योजना में निजी एवं सामूहिक खेती दोनों प्रकार की खेती का शामिल किया जाए। सब्जी एवं फलों की सुरक्षा हेतु उद्यान विभाग एवं खेती हेतु कृषि विभाग कार्यकारी संस्था के रूप में जिम्मेदारी दी जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रोटेक्शन वाॅल बनाने के लिये उपलब्ध करायी जाने वाली राशि का 80 प्रतिशत अनुदान के रूप में दिया जाए जबकि बाकि का 20 प्रतिशत को आसान किस्तों में जमा करने की पाॅलिसी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में खेती को बचाने हेतु किये जा रहे प्रयास काफी नहीं हैं। इसके लिये अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाए। जंगली जानवरों को दूर भगाने के लिये उपयोग की जा रही मशीनों के प्रयोग पर भी विचार किया जाए। उन्होंने इस योजना को तैयार कर जनता में प्रचार प्रसार करने के लिये कहा ताकि आमजन को इस योजना की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री श्री रावत ने वन विभाग को वनों में घिंघारू, हिंसर, आम व मालू के वृक्षों को उगाने के लिये कैम्पेन के रूप में चलाने को कहा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, अपर मुख्य सचिव डाॅ. रणवीर सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, गढ़वाल आयुक्त व सचिव सूचना विनोद शर्मा, सचिव अमित नेगी, प्रमुख वन संरक्षक आर.के. महाजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य में फलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये नर्सरीज को विकसित किया जाए। उन्होंने जम्मूकश्मीर से अखरोट के पौधों को मंगाने पर जोर देते हुए कहा कि अच्छी प्रजाति के पौधों को विकसित करने हेतु अन्य राज्यों से भी सम्पर्क किया जाए। उन्होंने चुलू और आड़ू के पौधों की नर्सरी तैयार की जाए। साथ ही उन्होंने इन पौधों को वन विभाग को मुफ्त उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने खुमानी(वाईल्ड एप्रीकोट) व अन्य सभी प्रकार के नट्स को इसमें शामिल करने को कहा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने बीकीपिंग (मौनपालन) को बढ़ावा देने के लिये उत्तराखण्ड की पाॅलिसी तैयार करने को कहा। उन्होंने इसके लिये बीवेन्डर योजना को शुरू करने के लिये निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि इसके लिये प्रशिक्षण देने के साथसाथ मौनपालन हेतु बक्से व जगह भी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिये करीपत्ता व पदम के वृक्षों का प्लान्टेशन किया जाए। इसके साथसाथ महुआ व चूड़े के वृक्षों को भी इसमें शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि पपीता, आम व लींची के लिये ऐसी प्रजाती तैयार की जाए, जो अन्य स्थानों से अलग सीजन में पैदा हो। आफ सीजन सब्जी उत्पाद की दिशा में कार्यवाही कर इसका क्षेत्रवार डाटा तैयार करने की भी उन्होंने बात कही। उन्होंने कहा कि 15 दिन में इसकी पूरी कार्य योजना बनाई जाए। प्याज, अदरक व हल्दी की पैदावार भी बढ़ायी जाए। उन्होंने कहा कि हमारे पास सब कुछ जैविक ही है, फिर भी इसे और बढ़ावा दिया जाए। हमें बुआई क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता है, इसके लिये योजना तैयार की जाए। उन्होंने मसाला सामग्री को भी इसमें सम्मिलित करने को कहा। टिमरू और तेज पत्ता को बढ़ावा देने के लिये मिशन चलाने के निर्देश दिए। रेशम विकास के लिये शहतूत व कोष की नीति तैयार करने की बात कही। मुख्यमंत्री श्री रावत ने मशरूम वेण्डर पाॅलिसी बनाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने मशरूम ग्रो सोसाइटी को बन्द मकानों को लीज पर देने व मशरूम से जुडे लोगों को मोटिवेट करने के लिये 50 लाख की धनराशि भी उन्होंने स्वीकृत की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से व्यक्ति सफल उद्यमी बनें यही हमारा प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि अच्छी प्रजाती के प्रमाणित के बीजों का वितरण, मंडुआ, फाफर के क्लस्टर के लिये धनराशि स्वीकृत शीघ्र स्वीकृत करने को कहा। उन्होंने कहा कि सीमान्त क्षेत्रों के गांवों को आबाद रखना हमारी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्पादकों को भी पुरस्कृत करने की व्यवस्था भी की जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। कृषि क्षेत्र को विकसित करना समय की जरूरत है। उत्पादों को संरक्षित करने तथा उनके विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राजमा व चैलाई के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये मिशन चलाया जाए व क्लस्टर विकसित किये जाए। चैलाई का उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़े यह सुनिश्चित किया जाए। किसानों को बोनस का वितरण भी शीघ्र किया जाए। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, अपर मुख्य सचिव डाॅ. रणवीर सिंह, गढ़वाल आयुक्त व सचिव सूचना विनोद शर्मा, सचिव अमित नेगी, प्रमुख वन संरक्षक आर.के. महाजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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