Press Note – Dehradun 9 September 2016


September 10, 2016 Facebook Twitter LinkedIn Google+ News - Information Department, Uttarakhand


हिमालय दिवस के अवसर पर दून विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जब हम हिमालय बचाओं की बात करते हैं तो स्वयं को बचाने की बात करते हैं। हिमालय को बचाना है तो हमें उन लोगों को भी अपने प्रयासों से जोड़ना होगा जिनका जीवन हिमालय पर आधारित है।

हिमालय दिवस के अवसर पर दून विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जब हम हिमालय बचाओं की बात करते हैं तो स्वयं को बचाने की बात करते हैं। हिमालय को बचाना है तो हमें उन लोगों को भी अपने प्रयासों से जोड़ना होगा जिनका जीवन हिमालय पर आधारित है। हिमलाय संरक्षण के लिए एक सामुदायिक चेतना जगानी होगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हिमालय के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। हिमालय दिवस हमसे समर्पण व समझ की अपेक्षा करता है। हमें एक डायरेक्ट एक्शन प्रोग्राम के रूप में खुद को समर्पित करना है। श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी हमारे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने जब वन संरक्षण अधिनियम संसद में प्रस्तुत किया था तो उन्होंने सुंदरलाल बहुगुणा जी का जिक्र किया था। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें सजग व सचेत रहते हुए पर्यावरण की रक्षा करनी है। इसके लिए लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी है। हम पहले राज्य हैं जो कि पेड़ लगाने पर बोनस दे रहा है। खासतौर पर चैड़ी पत्ती वाले पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी जा रही है। केवल सरकारी प्रयासों से हिमालय की रक्षा नहीं की जा सकती है। इसमें व्यक्तिगत प्रयासों को भी शामिल किए जाने की जरूरत है। सतत विकास हमारे जीवन जीने का तरीका होना चाहिए। पर्यावरण से संस्कृति को जोड़ने के लिए वृक्षारोपण को हरेला से जोड़ा गया। हिमालय बचाने को लेकर पहल की गई है। देश के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं, परंतु इसमें निरंतरता नहीं बन पा रही है। हमने वन विभाग के तहत पिछले वर्ष एक हजार जलाशय बनाए हैं और अब उन्हें 10 हजार जलाशयों का लक्ष्य दिया गया है। सिंचाई विभाग ने भी 10 बड़े जलाशय बनाए हैं। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् संुदरलाल बहुगुणा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को हिमालय संरक्षण की शपथ दिलाई। इस अवसर पर श्रीमती विमला बहुगुणा, प्रोफेसर वीके जैन, प्रोफेसर कुसुम अरूणाचलम सहित विश्वविद्यालय की अन्य फेकल्टी व छात्रछात्राएं उपस्थित थे।

 

शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांवली रोड़, लक्ष्मण चैक व डीएल रोड स्थित मलीन बस्तियों का निरीक्षण किया।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांवली रोड़, लक्ष्मण चैक व डीएल रोड स्थित मलीन बस्तियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन बस्तियों में नियमित रूप से फाॅगिंग व कैरोसीन का छिडकाव किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिकारी समयसमय पर आकर इन बस्तियों का निरीक्षण करें। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि अपने आस पास स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बारीश के पानी को जमा न होने दे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने स्वयं नालियों व आदि स्थानों में कैरोसीन का छिडकाव भी किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, विधायक व सभा सचिव राजकुमार, मुख्य नगर अधिकारी नितिन भदौरिया आदि उपस्थित थे।

 

शुक्रवार को सचिवालय में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को हिमालय संरक्षण की शपथ दिलाई।

शुक्रवार को सचिवालय में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को हिमालय संरक्षण की शपथ दिलाई। हिमालय को सबसे बड़ी विरासत बताते हुए पर्यावरण अनुकूल परम्परागत पद्धतियों को संरक्षित और पुनर्जीवित करने व जैविक खेती, चालखाल, वृक्षारोपण व जल संसाधनों का संरक्षण करते हुए हिमालय के अस्तित्व को बचाए रखने की प्रतिज्ञा दिलाई गई। मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों से सेल्फमोटिवेटेड होते हुए पर्वतीय क्षेत्रों के एकदो गांवों को गोद लेने को कहा। इस अवसर पर मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह सहित शासन में प्रमुख सचिव, सचिव व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्तरी भारत का जनजीवन मध्य हिमालय पर निर्भर है। देश व पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेवारी निभाने के लिए उत्तराखण्ड सीमित संसाधनों के होते हुए भी तत्पर है। हरेला पर्व के साथ हमने वृक्षारोपण को बड़े अभियान के तौर पर चलाया है। हम पेड़ लगाने पर बोनस दे रहे हैं, दुग्ध उत्पादन पर बोनस दे रहे हैं। साथ ही जल संरक्षण में चालखाल को प्रोत्साहित करने के लिए वाटर बोनस का भी निर्णय लिया है। हम अपने सीमित संसाधनों के साथ अपनी जिम्मेवारी निभाने के लिए तत्पर हैं। राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधन उपलब्ध करवाने में देश को भी आगे आना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखण्ड, जनपद देहरादून निवासी एवं 4/4 जी.आर. जवान शिव शंकर छेत्री की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखण्ड, जनपद देहरादून निवासी एवं 4/4 जी.आर. जवान शिव शंकर छेत्री की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने शहीद जवान की आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने अपने शोक संदेश में कहा कि उत्तराखण्ड वीरों की भूमि है। शहीद जवान शिव शंकर छेत्री ने अपनी शहादत से उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहीद हुए जवान के परिवार को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है।

 

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